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टीबी डायट पà¥à¤²à¤¾à¤¨ (TB Diet Plan)
टीबी के इलाज के दौरान लिवर पर पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पड़ने का डर रहता है, इसलिठटीबी का डायट पà¥à¤²à¤¾à¤¨ à¤à¥€ डॉकà¥à¤Ÿà¤° से पूछ लेना चाहिà¤à¥¤ टीबी डायट पà¥à¤²à¤¾à¤¨ (TB Diet Plan) ठीक होगा, तà¤à¥€ दवा à¤à¥€ ठीक तरह से काम करेगी।
टीबी डायट पà¥à¤²à¤¾à¤¨ : टीबी मरीजों के लिठबेसà¥à¤Ÿ फूड
टीबी के मरीज को संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ आहार देना चाहिà¤à¥¤ टीबी डायट पà¥à¤²à¤¾à¤¨ (TB Diet Plan) या टà¥à¤¯à¥‚बरकà¥à¤¯à¥à¤²à¥‰à¤¸à¤¿à¤¸ में डायट के बारे में पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ है कि जितना महंगा खाना खिलाà¤à¤‚गे, उतना ही मरीज जलà¥à¤¦à¥€ सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ होगा। लेकिन यह सच नहीं है। इस बात का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना चाहिठकि आहार में पौषà¥à¤Ÿà¤•ता à¤à¤°à¤ªà¥‚र मातà¥à¤°à¤¾ में हो और वह संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ हो। टीबी के इलाज के दौरान à¤à¥‚ख कम लगती है और मरीज खाना नहीं चाहता। इसलिठखाना हेलà¥à¤¦à¥€ होने के साथ सà¥à¤µà¤¾à¤¦à¤¿à¤·à¥à¤Ÿ à¤à¥€ होना चाहिà¤à¥¤ जैसे-जैसे शारीरिक सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ बेहतर होने लगती है, मरीज खà¥à¤¦ नॉरà¥à¤®à¤² तरीके से खाना शà¥à¤°à¥‚ कर देता है।
चलिà¤, अब देखते हैं कि टीबी डायट पà¥à¤²à¤¾à¤¨ (TB Diet Plan) में कà¥à¤¯à¤¾-कà¥à¤¯à¤¾ शामिल होना चाहिà¤à¥¤ समà¤à¤¨à¥‡ में सहà¥à¤²à¤¿à¤¯à¤¤ हो, इसके लिठडायट पà¥à¤²à¤¾à¤¨ को पांच à¤à¤¾à¤—ों में बांट लेते हैं-
ताजी सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ और फल
दूध और दूध से बनी चीजें
अंडा, मांस और मछली
अनाज और दाल
तेल, फैट और नटà¥à¤¸
à¤à¤¸à¥‡ लोगों को बà¥à¤°à¥‹à¤•ली, गाजर, टमाटर, शकरकंद जैसी सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ खूब खानी चाहिà¤. इन सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में à¤à¤‚टीऑकà¥à¤¸à¤¿à¤¡à¥‡à¤‚टà¥à¤¸ à¤à¤°à¤ªà¥‚र होते हैं. फल- टीबी के संकà¥à¤°à¤®à¤¿à¤¤ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को फलों में अमरूद, सेब, संतरा, नींबू, आंवला, आम जैसे फल खाने चाहिà¤. इन फलों में विटामिन A, E और विटामिन C से काफी होता है.
अगर आप टीबी मरीज के डायट पà¥à¤²à¤¾à¤¨ में सà¤à¥€ फूड गà¥à¤°à¥‚प से फूडà¥à¤¸ को शामिल करेंगे, तो वह आहार संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ à¤à¥€ हो जाà¤à¤—ा और मरीज को पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ता à¤à¥€ सही मातà¥à¤°à¤¾ में मिल जाà¤à¤—ी। टीबी डायट पà¥à¤²à¤¾à¤¨ में यह देखना चाहिठकि à¤à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€ और पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨, डायट में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होना चाहिà¤à¥¤ रोटी में घी या मकà¥à¤–न लगा देने से मरीज थोड़ा जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ खा सकता है। तेल और फैटà¥à¤¸ à¤à¤¨à¤°à¥à¤œà¥€ के लिठहोते हैं, इसलिठसंतà¥à¤²à¤¿à¤¤ मातà¥à¤°à¤¾ में इनका सेवन कराना चाहिà¤à¥¤ मांस, मछली और दूध के सेवन से मरीज को जितने पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ की जरूरत होती है, उसको पूरा करने में मदद मिलती है। सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में पतà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤° सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¤¾à¤‚, विटामिन और मिनरल के जरूरत को पूरा करने में सहायता करती है।
टीबी डायट पà¥à¤²à¤¾à¤¨ (TB Diet Plan) या टà¥à¤¯à¥‚बरकà¥à¤¯à¥à¤²à¥‰à¤¸à¤¿à¤¸ में डायट में इन सब बातों का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना इसलिठजरूरी है कि इनके अà¤à¤¾à¤µ में मरीज कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ (malnutrition) का शिकार हो सकता है, जिससे मरीज की शारीरिक सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ और à¤à¥€ खराब हो सकती है। इस कारण दवाà¤à¤‚ रोग के लिठठीक तरह से काम नहीं कर पाà¤à¤‚गी और शरीर इस बीमारी से लड़ नहीं पाà¤à¤—ा। टीबी के अधिकतर मरीजों का वजन बहà¥à¤¤ कम हो जाता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि वह ठीक तरह से खा-पी नहीं पाते। इसलिठडॉकà¥à¤Ÿà¤° हमेशा मरीज के डायट पà¥à¤²à¤¾à¤¨ पर नजर रखने के लिठकहते हैं। इसके अलावा मरीज को थोड़ी बहà¥à¤¤ फिजिकल à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µà¤¿à¤Ÿà¥€ à¤à¥€ करनी चाहिà¤, जिससे कि à¤à¥‚ख लगे और मरीज अचà¥à¤›à¥€ तरह खा पाà¤à¥¤
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